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Sunday, 10 July 2016

थोडिसी बेवफ़ाई जी लेने दो !





छूट गया जीना, कबका मेरे यारो ..
संभले हुए यारो, जलते हुए यारो 
मन उड़ जाए, आसीकी उतर आए 
आवारा जग ढूंदे, लापता जाग जाए I

यह नशियत और ना दो हुज़ूर
इख्तियार, इस्क़ हुकूमत गया
बहुत हो गया, मन का नैया   
मन की धारा ये उमर का घेरा
ना जाने दिल, दिल है कन्हैया I 

दिल चुपके तरसे और चाहे 
कही घूम आए, कही गुम जाए 
कोई हिसाब ना माँगे, खो जाए 
हसीन  पल चुपके फ़िर आए I

क्या बताए दिल कब कब चाहे 
कहानी बने, इतिहास ना लिख पाए 
ना कोई रिश्ते इतिहास नज़र आए 
भूले कुच्छ पल आए, महफ़िल सजाए 
बहकाए, महकाए, नज़राना दे सताए I

रचना : प्रशांत 

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