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Thursday, 22 December 2016

शाम के पल...

शाम के पल, ना महके ना गुज़रे,
चाहे, मोहब्बत किस्मत  ना सँवारे,
मन की बात गले से ना उतरे,
जाम सजे, अंजान आप से रहे,
कितने थे रंग शाम साज़ ये गहरे,
दिलकश वो पहरे,
ना दिल ना ठहरे, ना ठहेरे,
पैमाने छलके, दे तुझे इशारे,
हसीनो की बाज़ार, हुस्न ही हारे I

चेहरे जगाए , यह चेहरे शराबी,
याद सताए, यादों का गुलामी,
इश्क़ के धागे , सपने फरेबी,
कतरा यह पानी, कतरा शबनमी,
कितने थे रंग शाम साज़ ये गहरे,
दिलकश वो पहरे,
ना दिल ना ठहरे, ना ठहेरे,
पैमाने छलके, दे तुझे इशारे,
हसीनो की बाज़ार, हुस्न ही हारे I

चेहरे जगाए , यह चेहरे शराबी,
याद सताए, यादों का गुलामी,
इश्क़ के धागे , सपने फरेबी,
कतरा यह पानी, कतरा शबनमीI

रचना : प्रशांत 

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