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Saturday, 7 March 2015

क्या होली थी, कुछ याद है....


चित्र   साभार :  http://www.happyholi2015.org/2015/02/happy-holi-2015-images.html


क्या होली थी, कुछ याद है,  
और कुछ याद नहीं  ,                                                                               
कभी हम करते थे शोर की सवारी  , 
कभी सुनसान खामोशी थी हम पे भारी I


क्या होली थी क्या बोली थी , 
किससे रोए मिले, बिन कहे मिले ,
हँसी की गोली जहाँ तहाँ बिखरे ,
होश मे रहे , गिरे और ठहरे I


कुछ याद आए वो लस्सी की प्यास , 
स्प्राइट पे भारी वोदका की गिलास , 
माँग माँग खाए वो भांग के पकोडे ,
उड़ जाने के डर से टेबल को जकड़े I

जय जय शिव शंकर की भावना ,
बीच मे हनी सिंग का घुसना , 
कभी मन ही मन गुनगुनाना ,
गाने के बोल मे आक्टिंग कर जाना I

होली ने लौटा दी वो ही पुरानी  महफ़िल ,
दोस्तों में  वो ही  प्यार और दरियादिली, 
भगवान तुझे शत शत प्रणाम ,
होली के दिन रहे दुनिया हर दम रंगीली I

रचना : प्रशांत 

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