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Tuesday, 4 October 2016

प्रोहिबिशन की कर्फ्यू!

यह शहर कैसा,
शराब बदनाम यारों,
ख्वाइसों  मे ज़िंदा,
दफ़न हुकूमत मे यारों...

गम ना कर ,
चाहनेवाले तेरे इस ,
शहर मे आज भी ज़िंदा,
और उनकी चाहत से
यह शहर आज भी है ज़िंदा..

रचना : प्रशांत 

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