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Monday, 12 September 2016

जी भर, जी लेने दे साकी!




आज मर जाने दे साकी,
                                            एक ख्वाब जीने दे बाकी,                                              
आज पी लेने दे बाकी,
बह जाने दे सागर,
बस डूब ने दे मुझे,  
संभाल ने दे मुझे I

आज मर जाने दे साकी,
एक ख्वाब जीने दे बाकी I 
जो ना था कभी, था कभी, 
महसूस होने दे, जीने दे,
एहसास दे, एहसान करने दे,
ख्वाब दे , ख्वाबोंको मिलने दे I

आज मर जाने दे साकी,
एक ख्वाब जीने दे बाकी I 
पैमाने रंग भरे संग मेरे,
नज़ारा बार बार झलके,
सपनो से परे तक़दीर,
लकीरोंसे दिखे बेह्के I

आज मर जाने दे साकी,
एक ख्वाब जीने दे बाकी I
जीने दे इन प्याले मे डूबके,
तसबीर दिखे, अलग भी दिखे,
अश्क छलकाए, पैमाने भर जाए,
नूर ना आए, लिहाज़ हो जाए I

आज मर जाने दे साकी
एक ख्वाब जीने दे बाकी I 

रचना : प्रशांत 

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