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Monday, 12 January 2015

आज फिर जवां हुए...

आज फिर जवां हुए, कैसे क्या जाने ,
दोस्तों ने मिलाया क्या, क्या हम जाने,
होठोमे बरसे जो प्यार, आज क्या जाने,
कदम बहकने  ने लगे हैं, हम क्या जाने,

ऐ मेरे यारो, ये चाँदनी रात सिर्फ़ तुमसे सजे,
और यह चाँद भी बार बार , सिर्फ़ तुमसे सजे,
ये चौदवी  के चाँद , उम्र चालीस मे दिखे,
ये चाँद तेरे महफ़िल मे , आज बार बार दिखे,

शुक्रिया दोस्तों तुमसे मेरे ए दुनिया सजे, 
दिल तो है तुम से जवां, जवां पल ही सजे,
खुश  रहो मेरे यारो , हम उम्र तुमको लगे,
तुम रहो और जवां , ये चाँद जवां  और लगे I 

रचना: प्रशांत  

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