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Monday, 12 January 2015

कुछ अनकही बातें...

कुछ अनकही बातें,
कैसे तुमसे आज कहे,
जब वो यादें, वो रातें ,
तुमको, तुम्हारी ना लगे,
गुज़री जो पल, वो पल,
तेरे वो कल, जो हुए कल ,
मेरे वो पल, मेरे अनमोल,
हुए ना कल, मेरे वो पल,
आज ये मन क्यूँ,
कुछ  दबा दबा सा लगे,
तेरी यादें तेरे जाने से,
मेरे अपने क्यूँ लगे ?
अनकही बात तेरी नज़रों से 
आज भी छुपी क्यूँ है ?
मेरे नज़रों के इनायत
कहीं मुझसे छुपी तो नही ?

रचना: प्रशांत  

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