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Tuesday, 3 February 2015

जिंदगी तू क्यूँ नज़र आए...

जिंदगी तू क्यूँ नज़र आए, 
जब मेरे जाने की बारी हो, 
कुछ पल की मेहमान से, 
क्यूँ हिसाब लेने के ज़िद हो I 

जब शरीर बोझ लगे, और
आत्मा सोच से हो परे, 
कुछ्पल अगर ऐसे जिंदा हैं, 
क्यूँ हिसाब लेने के ज़िद हो I

रचना : प्रशांत 

2 comments:

  1. Profound. Life has strange ways to evoke emotions.

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  2. Sure it has.

    Thanx saru for coming to the blog and commenting.

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