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Monday, 23 November 2015

हमसफ़र आज कहने दो

हमसफ़र आज कहने दो,
दोषी हैं  हम , तारीफ़ कभी ना कर पाए,
आपसे मुहब्बत कभी बता ना पाए, 
बाँहों  में आपके, सुकून से हम खो जाए, 
इशारे आप करें, हक़ ना जताएं,
मुस्कुराके , हर सितम झेल जाएँ,
दोष है मेरा, तारीफ़ ना कर पाए,
आपसे है मुहब्बत, जता भी ना पाए I

जाने तमन्ना हमे ये होश बार बार आए,
कोई रूठिसी मुहब्बत राह नज़र आए,
प्याले मे एक तस्वीर नज़र मिलाने चली आए,
जीतने करू ख़तम,उतने करीब आए I

क्या बताएं आपकी ये कशिश,
नशे और सुर मे उतर आए,
हम महफ़िल साथ ले आएं,
नशेमन दिल का ये गुलाम,
हाज़िर है, आप  सलाम ले जाए...

रचना : प्रशांत 

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