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Sunday, 8 November 2015

इतेफ़ाक़ से निकले लव्ज़...



इतेफ़ाक़ से निकले लव्ज़,
दिल के हो करीब, 
इतना नही था पता,
मूड के देखे तो लगा,
लावारिश जो हमसे जुदा निकले, 
मेरी कविता कहलाए, 
भले अंजान यू निकल आए I

रचना : प्रशांत 

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