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Monday, 12 October 2015

मुसाफिर है तू तेरा ठिकाना कहाँ




चित्र साभार :http://www.roomsuggestion.com/Best-Destinations-for-Solo-Travellers-



मुसाफिर है तू तेरा ठिकाना कहाँ ,
आज इधर कल जाएगा जाने कहाँ ,
जहाँ रुका तू समझ के  मंज़िल ,
वहीँ एक आवाज़ फिर दी  सुनाई,
मुसाफिर तेरा ठिकाना कहाँ I 

ये  दुनिया है सारी तेरी ,
तू खोज इसे, तू अंजाना कहाँ,
उठ चल के मज़िल तो अभी  दूर है,
अभी जिस्म में जान भी जरूर है,
चल समय के अंत तक,
की तुझ सा दीवाना कहाँ I 

रचना :प्रशांत 


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