आज फिर जवां हुए, कैसे क्या जाने ,
दोस्तों ने मिलाया क्या, क्या हम जाने,
होठोमे बरसे जो प्यार, आज क्या जाने,
कदम बहकने ने लगे हैं, हम क्या जाने,
ऐ मेरे यारो, ये चाँदनी रात सिर्फ़ तुमसे सजे,
और यह चाँद भी बार बार , सिर्फ़ तुमसे सजे,
ये चौदवी के चाँद , उम्र चालीस मे दिखे,
ये चाँद तेरे महफ़िल मे , आज बार बार दिखे,
शुक्रिया दोस्तों तुमसे मेरे ए दुनिया सजे,
दिल तो है तुम से जवां, जवां पल ही सजे,
खुश रहो मेरे यारो , हम उम्र तुमको लगे,
तुम रहो और जवां , ये चाँद जवां और लगे I
रचना: प्रशांत
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